"कांच"
वो घर को निकल ही रहा था कि अचानक से उसका फोन घनघनाया, जेब से फोन निकालकर देखा तो आंखों में अद्भुत चमक आ गई फोन रिसीव किया तो उधर से किसी के मायूसी से बोलने की आवाज आई वो रोते हुए बोल रही थी
"वो मेरे हाथों से छूट कर गिर गया कितनी लापरवाह हूं मैं आपका पहला तोहफा भी संभाल कर नहीं रख सकी मन्नू"
मन्नू उधर से आ रही आवाज और सिसकियों को अच्छे से महसूस कर रहा था उसने दिलासा देते हुए समझाया -
"कोई बात नहीं अब गिर गया तो गिर गया,इसे फेंक दो. अब सिर्फ कांच ही तो बचा है और ला देंगे"
दरअसल बात कुछ घण्टे पहले की थी शहर से मन्नू उनके लिये एक तोहफा लाया था और कोचिंग खत्म होनें के बाद तोहफा उनको दे दिया गया था इसके बाद दोनों अपनें-अपनें घर की तरफ निकल पडे थे | वो जैसे ही अपनें घर पहुंची, तोहफा खोलनें की हडबडी में हाथ से छूटकर वो जमीन पर गिर गया, इसी को लेकर वो शांत होने का नाम नहीं ले रही और अपने आप को कोसे जा रही थी, फिर अचानक से बोली कि आपको पता है कि यह आपका दिया पहला तोहफा है मैं इसे नहीं फेंक सकती | आपने कैसे सोच लिया ऐसा कि मैं फेक दूंगी, मै इसे जोड लुंगी और हमेशा अपने पास रखूंगी यह मेरी मोहब्बत की पहली निशानी है | मन्नू ने भी सहमति में हां ठीक है, कह दिया |
उस "कांच" नें टूटकर भी दो दिलों को और बेहतर जोड दिया | मन्नू उधर से आ रही आवाजों को सुननें में इतने मशगूल हुआ कि घर पहुंच कर बात करते-करते कब सो गया, पता ही नहीं चला |

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