रोज हसरत होती है तुझे कागज पर उतार दूँ पर अफसोस, बो कागज रोज भीग जाता है... ➡ रात बडी है कोई जख्म ही कुरेद लूँ तन्हाँ रहकर भी कहाँ वक्त गुजरता है... ➡ मोहब्बत में अच्छे शायर हुये वैसे कहाँ अल्फाज समझ आते थे... ➡ तेरी उम्मीद के सिवाय मुझे कुछ भी हासिल नहीं बहुत कर्जदार हो चुका हूँ मैं जमानें का... ➡ पी लिया करता हूँ थोडी सी , शाम में मुझे रोकनें अब तुम कहां आते हो ➡ पडा रहता हूँ बंद करके दरवाजा एक कोनें में मेरा हाल पूछनें अब कौन आता है?... ➡ नाकामियों ने इतना समझदार बना दिया ताउम्र कितावों से क्या हासिल होता... ➡ कुछ बरबाद सपनें, कुछ सूखे हुये अश्क मेरी आँखों में इसके सिवा कुछ भी तो नहीं... ➡ शहर में उनके अपनें निशां ढूढता हूँ इक रोज जहां हमनें आशियां बनाया था... ➡ बसेरा छोड गया परिन्दा कोई फिर से यकीनन किसी नें उसे जी भर के सताया होगा... ➡ कैसे नीलाम कर दूँ तेरे इश्क की दौलत ? पूरी जिंदगी यही कमाई है मैंने... ➡ हाँ शरीफ हुआ करते थे कल तक आज हम सा ...
ALL ABOUT LOVE...