Skip to main content
 "खयालों के पुलिंदे"


खयालों के पुलिंदों के बोझ तले
दबा यूँ कि दबा  रह गया
कुछ कीमती, कुछ रद्दी से खुरदरे
और दिमाग को वहम से भर देने वाले

कुछ सच्चाईयां जिंदगी की
मुझे समझानें के लिये गढी गई
जानें कितनी गीता और आयतें
मेरी सलामती के लिये पढी गईं

नापाक रूह थी आखिर कैसे
पाक होती
मुझसे जुदा होकर जिंदगी
क्यों चैन से फिर न सोती
मैं तो आदतन बंजारा, बेगाना था
रास्तों में उतर कर कहीं फिर गुम हो गया

खयालो के पुलिंदों के बोझ तले
दबा यूँ कि दबा  रह गया
कुछ कीमती, कुछ रद्दी से खुरदरे
और दिमाग को वहम से भर देने वाले...

Comments

Popular posts from this blog

स्वरचित

रोज हसरत होती है तुझे कागज पर उतार दूँ पर अफसोस, बो कागज रोज भीग जाता है... ➡ रात बडी है कोई जख्म ही कुरेद लूँ तन्हाँ रहकर भी कहाँ वक्त गुजरता है... ➡ मोहब्बत में अच्छे शायर हुये वैसे कहाँ अल्फाज समझ आते थे... ➡ तेरी उम्मीद के सिवाय मुझे कुछ भी हासिल नहीं बहुत कर्जदार हो चुका हूँ मैं जमानें का... ➡ पी लिया करता हूँ थोडी सी , शाम में मुझे रोकनें अब तुम कहां आते हो ➡ पडा रहता हूँ बंद करके दरवाजा एक कोनें में मेरा हाल पूछनें अब कौन आता है?... ➡ नाकामियों ने इतना समझदार बना दिया ताउम्र कितावों से क्या  हासिल होता... ➡ कुछ बरबाद सपनें, कुछ सूखे हुये अश्क मेरी आँखों में इसके सिवा कुछ भी तो नहीं... ➡ शहर में उनके अपनें निशां ढूढता हूँ इक रोज जहां हमनें आशियां बनाया था... ➡ बसेरा छोड गया परिन्दा कोई फिर से यकीनन किसी नें उसे जी भर के सताया होगा... ➡ कैसे नीलाम कर दूँ तेरे इश्क की दौलत ? पूरी जिंदगी यही कमाई है मैंने... ➡ हाँ शरीफ हुआ करते थे कल तक आज हम सा ...

स्वरचित

" कौन समझता है यहां किसी की बेबसी, मुस्कराते चेहरे का दर्द किसने देखा है? "   शायरी पुरानें समय से ही हिन्दुस्तान में काफी प्रचलन में रही है मिर्जा गालिब, मीर तक़ी मीर, बसीम बरेलवी, मुनव्वर राना, राहत इन्दौरी ये शायरी की दुनियां में ऐसे नाम हैं जो किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं । इन शायरों नें अपनी शायरी, अपनें कलामों के जरिये अपनी आवाज लोगों के दिलों तक पहुंचाई है मिर्जा गाल़िब की एक शायरी मुझे अक्सर याद आ जाती है वो कितना सुंदर लिखते हैं कि  "उम्र भर गालिब एक ही भूल करता रहा, धूल चेहरे पर थी और मैं आईना साफ करता रहा" शायरी का जन्म दिल से होता है जब किसी का दिल किसी से लगता है तो हर चीज हसीन हो जाती है व्यक्ति न चाहते हुए भी शायराना हो जाता है ठीक इसके विपरीत दिल टूटनें पर अपना दर्द बयान करने के लिए शायरी सबसे कारगर साबित होती है ।  जब कभी दिल का सुकून खो जाये जब रातों को नींद नहीं आये,  जब सबके होते हुए भी किसी के होने का होश न रहे तो इंसान निकल पडता हैं खयालों की एक ऐसी दुनियां में जिसकी कोई मंजिल नहीं होती । फिर उस खयालों की दुनिया में क...